झाल-उलेढा सती माता मंदिर में रामकथा: "पिता का दर्जा पर्वत से भी ऊंचा, समर्पण करने वालों को ही याद रखती है दुनिया" - आचार्य कुलदीप बिजनौर थाना क्षेत्र हीमपुर दीपा के ग्राम झाल-उलेढा स्थित सुप्रसिद्ध सती माता मंदिर के प्रांगण में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास आचार्य कुलदीप जी महाराज ने भगवान श्री राम के वनवास और उनके आदर्शों का मर्मस्पर्शी वर्णन कर पंडाल में मौजूद सभी भक्तों को भावविभोर कर दिया। राजा दशरथ की कर्तव्यनिष्ठा और मंथरा का भ्रमजाल कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए आचार्य कुलदीप महाराज ने कहा कि जब अयोध्या की सभा में श्री राम के राज्याभिषेक की घोषणा हुई, तो पूरी अयोध्या नगरी आनंद और उत्सव में डूब गई। राजा दशरथ की कर्तव्यनिष्ठा में देशप्रेम छुपा हुआ था। लेकिन, श्री राम से अगाध प्रेम करने वाली माता कैकेयी को उनकी दासी मंथरा ने अपने कुटिल विचारों से भ्रमित कर दिया। मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने राजा दशरथ से पूर्व में मिले दो वरदान मांग लिए। इन वरदानों के तहत उन्होंने भरत के लिए राजतिलक और श्री राम के लिए 14 वर्ष का कठोर वनवास मांग लिया। यह सुनते ही राजा दशरथ गहरे शोक और चिंता में डूब गए और अपने कक्ष से बाहर नहीं निकले। रघुकुल रीत सदा चली आई... महाराज जी ने बताया कि जब श्री राम ने पिता व्याकुलता का कारण पूछा, तो दशरथ जी ग्लानि के कारण उनसे बात नहीं कर पा रहे थे। तब श्री राम ने पिता के वचनों को सर्वोपरि रखते हुए कहा कि: "रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाई पर वचन न जाई।।" श्री राम ने पिता के गौरव को बढ़ाते हुए कहा कि पिता का दर्जा तो पर्वत से भी ऊंचा होता है। भरत के प्रति अपने प्रेम को दर्शाते हुए राघव ने कहा, "मैं तो भरत के लिए पूरे जीवन भर वन में रह सकता हूं यह दुनिया केवल अधिकार जताने वालों की नहीं बल्कि सर्वस्व समर्पण करने वालों को ही याद करती है जाहि विधि राखे राम में ही कल्याण कथा व्यास में भक्तों को समझाते हुए कहा कि मनुष्य का कल्याण जाहि विधि राखे राम जाहि विधि रहिए की भावना में ही कल्याण छुपा हुआ है ईश्वर की इच्छा में खुद को सौंपते नहीं सच्ची भक्ति है मार्मिक रहा पति-पत्नी का संवाद कथा के दौरान श्री राम और माता सीता के बीच हुए संवाद का महत्वपूर्ण चित्रण किया गया सीता जी ने श्री राम के साथ बन जाने की जिद करते हुए कहा की जीव के बिना शरीर का कोई अस्तित्व नहीं होता है वैसे ही पति के बिना पत्नी का कोई मूल्य नहीं है मैं आपके बिना अयोध्या के राजमहल में नहीं रह सकती इसके बाद श्री राम माता सीता लक्ष्मण की बन यात्रा शुरू हो जाती है। इसके अतिरिक्त कथा व्यास जी ने श्रद्धालुओं को बताया कि ईश्वर की स्तुति करने से ही कीर्ति और लक्ष्मी वृद्धि होती है। आज राम कथा सुनना है श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कार्यवा मुकेश कुमार,संघ के ही जिला संपर्क के प्रमुख हिमांशु कुमार, परिवार प्रबोधन के मेरठ प्रांत के प्रशिक्षक श्री पृथ्वी सिंह, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री संगठन एवं मध्य प्रदेश हरियाणा उत्तराखंड के प्रभारी डॉक्टर नरेश पाल सिंह, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष डॉ भानु प्रकाश वर्मा, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष श्री जितेंद्र सिंह, सत्यपाल सिंह, चौधरी महेंद्र सिंह, संग्राम सिंह, ओम प्रकाश सिंह, कुलदीप विद्यार्थी आदि हजारों की संख्या में मौजूद रहे। आचार्य जी का राम कथा में सुंदर भजनों मे सहयोग करने वाली कविता आर्या सिंह एवं ऋषि का आर्या का विशेष योग रहा।
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